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मई, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
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शायरी घर है बेख़याली का बड़ी अजब खुमारी है उस मोड़ पर आकर सारी दुनिया हारी है कैसे भूल जाऊ उसको एक दो बरस में मैं जिसके इश्क में हमने एक उम्र गुजारी है .