कवि वैभव कटियर

      



                                  जुदा हमसफ़र



       अब इश्क़ के बाजार मे वो फनकार नही आता
      जो इस दिल पे दावा करे वो दावेदार नही आता
     आज भी जब कभी उन्हे ख्वाबों मे देख लेता हूँ
    कसम से कई महीनो तक ,, करार नही आता

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